डायबिटीज़ में आंखों की खतरनाक समस्या – समय पर जांच ही बचा सकती है नज़र!

देहरादून।  देश में डायबिटीज़ के बढ़ते मामलों ने सिर्फ शुगर ही नहीं बढ़ाई, बल्कि आंखों की बीमारियों का खतरा भी गंभीर कर दिया है। डायबिटिक रेटिनोपैथी अब रोकने योग्य दृष्टिहीनता का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।

डॉ. बीएम विनोद कुमार, कंसलटेंट ओफ्थल्मोलॉजिस्ट, बताते हैं कि “अकसर मरीज तब आते हैं जब समस्या बढ़ चुकी होती है। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से स्थायी दृष्टि हानि का खतरा काफी कम किया जा सकता है।”

कौन है ज्यादा जोखिम में?

  • लंबे समय से डायबिटीज वाले

  • जिनका शुगर नियंत्रण में नहीं

  • उच्च रक्तचाप या अन्य मेटाबॉलिक रोग वाले

लक्षण अक्सर धीरे-धीरे आते हैं: धुंधली दृष्टि, फ्लोटर्स, विकृत दृष्टि और अचानक गिरावट।

आधुनिक इलाज से नई उम्मीद

  • फंडस इमेजिंग और ओसीटी जैसी तकनीकें

  • लेज़र थेरेपी और इंट्राविट्रियल एंटी-VEGF इंजेक्शन

  • विट्रियोरेटिनल सर्जरी

डॉ. सोनल बंगवाल के अनुसार, मोतियाबिंद की समय पर सर्जरी से रेटिना साफ दिखता है, जिससे मैकुलर एडिमा और अन्य जटिलताओं का जल्दी पता चलता है और दृष्टि परिणाम बेहतर होते हैं।

विशेषज्ञों का संदेश

  • साल में कम से कम एक बार आंखों की पूरी जांच जरूरी

  • शुगर कंट्रोल और समय पर आंखों का इलाज नज़र बचाने में अहम

  • फिज़िशियन और नेत्र विशेषज्ञ के बीच तालमेल जरूरी

“डायबिटीज़ सिर्फ शुगर नहीं, आंखों की चुपचाप समस्या भी है। समय रहते जांच कर ही आप स्थायी दृष्टि हानि से बच सकते हैं,” विशेषज्ञों की चेतावनी।

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