नई टिहरी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और हर हाथ को काम देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन” को लेकर बुधवार को जिला मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) देहरादून के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में योजना के नए प्रावधानों और इससे आम जनमानस को होने वाले लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक किशोर उपाध्याय ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब ग्रामीणों को रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जो ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
बतौर मुख्य अतिथि कार्यशाला को संबोधित करते हुए विधायक किशोर उपाध्याय ने कहा कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी-ग्राम जी) समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए आशा की एक नई किरण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अधिनियम का लक्ष्य केवल रोजगार देना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से गांवों में टिकाऊ और स्थाई संपत्ति का निर्माण करना है। विधायक ने कहा कि जल सुरक्षा, ग्रामीण संपर्क मार्ग, नेटवर्क कनेक्टिविटी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि हमारे गांव आत्मनिर्भर बन सकें।
जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने योजना के क्रियान्वयन पक्ष पर बात रखते हुए कहा कि मनरेगा के इस नए स्वरूप को धरातल पर उतारते समय आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों का अध्ययन किया जा रहा है। इन चुनौतियों को स्पष्ट रूप से शासन के संज्ञान में लाया जाएगा ताकि पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंच सके। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रावधानों को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाने में प्रशासन का सहयोग करें, क्योंकि जागरूकता ही सफलता की कुंजी है।
कार्यशाला में पीआईबी के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल ने श्विकसित भारत-ग्राम जी अधिनियमश् की बारीकियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस मिशन का मुख्य फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ परिवारों की आय सुरक्षा को मजबूत करना है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी, जो पहले 100 दिन थी। यह मिशन चार प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में काम करेगा और टिकाऊ अवसंरचना के साथ मजदूरी आधारित रोजगार को जोड़ेगा।
जिला विकास अधिकारी मोहम्मद असलम ने तकनीकी सत्र में बताया कि यह दुनिया की एकमात्र ऐसी योजना है जो अकुशल श्रमिकों को भी रोजगार की कानूनी गारंटी देती है। नियम के अनुसार, काम की मांग करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है, अन्यथा आवेदक बेरोजगारी भत्ते का हकदार बन जाता है। उन्होंने बताया कि इस योजना में महिलाओं की भागीदारी 33 प्रतिशत सुनिश्चित की गई है और समान कार्य के लिए समान वेतन का प्रावधान है। उन्होंने वित्तपोषण के गणित को समझाते हुए कहा कि मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है।
