टिहरी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्वरूप और नाम में किए गए परिवर्तनों के खिलाफ कांग्रेस का आक्रोश अब थौलधार विकासखंड की सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत मंगलवार को प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पट्टी जुवा के कांडीखाल से अलेरू तक एक विशाल पदयात्रा निकाली। इस दौरान हाथों में तख्तियां और जुबां पर नारेबाजी के साथ कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मनरेगा कानून में किए गए संशोधनों को रद्द कर इसे पुराने स्वरूप में बहाल नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी देशव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगी।
कांडीखाल से शुरू होकर अलेरू तक पहुंची इस पदयात्रा का नेतृत्व करते हुए विधायक विक्रम सिंह नेगी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार” कर दिया है, जो न केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी महान विभूतियों का अपमान है, बल्कि रोजगार के मौलिक अधिकार पर भी कुठाराघात है। नेगी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नए प्रावधानों के तहत मनरेगा अब रोजगार की कानूनी “गारंटी” नहीं रही, बल्कि महज एक सरकारी “योजना” बनकर रह गई है। इससे अकुशल और कुशल श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि अब काम मांगना उनका कानूनी हक नहीं रह जाएगा। भले ही नए नियम में 125 दिन के रोजगार की बात कही गई हो, लेकिन “गारंटी” शब्द के हट जाने से मजदूरों का भविष्य असुरक्षित हो गया है।
