उत्तरकाशी। जिला मुख्यालय के निकट बोंगा गांव में पांच गांवों एवं ध्याणियों ने देव डोलियों के साथ कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा के साथ नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कथा वक्ता भागवत भूषण आचार्य पं० महामाया प्रसाद शास्त्री नेकथा में माता सती के देह त्याग और पार्वती के जन्म का प्रसंग सुनाया गया। श्रोताओं ने पार्वती जी और उनकी माता मैना रानी के बीच हुए संवाद को सुना। भगवान शिव के लिए पार्वती द्वारा किए गए तप का वर्णन भी किया गया।
व्यास जी ने रामचरित मानस की चौपाई के माध्यम से तप का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि विष्णु, शंकर और ब्रह्मा जी अपने-अपने कार्यों को तप के बल से ही करते हैं। शेषनाथ भी तप के बल से ही पृथ्वी को धारण करते हैं।कथा में स्यमंतक मणि की कथा का वर्णन किया गया। द्वापर युग के व्यासों के नाम बताए गए। लक्ष्मी द्वारा भगवान विष्णु को दिए गए शाप और उनके हयग्रीव अवतार की कथा ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कथा के अंत में रेवती नक्षत्र के पतन और पुनर्स्थापना की कथा सुनाई गई। व्यास जी ने श्रीमद् देवी भागवत कथा की श्रवण विधि और नियमों को सरल तरीके से समझाया। महाराज दूरदुम के पुत्र प्राप्ति की कथा सुनकर श्रोताओं ने मां भगवती की जय-जयकार की। ऋषियों द्वारा वर्णित पुत्र के चरित्र का हास्यास्पद वर्णन सुनकर सभी प्रसन्न हुए।
