आमदनी का जरिया बनेंगी चीड़ की पत्तियां, वन विभाग खरीदेगा दस रुपये किलो पीरुल, मनरेगा के तहत जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर

 

नई टिहरी। चंबा विकासखंड मुख्यालय के सभागार में क्षेत्र पंचायत प्रमुख सुमन सजवाण की अध्यक्षता में आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक में विकास कार्यों और जनसमस्याओं पर व्यापक मंथन किया गया। बैठक में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद क्षेत्रीय विधायक किशोर उपाध्याय और जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल के समक्ष जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। विधायक किशोर उपाध्याय ने सदन को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में सदन की एक गरिमा होती है और सभी सदस्यों को उसी अनुरूप अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से रखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि वे बीडीसी की बैठकों में महज औपचारिकता के लिए न आएं, बल्कि पूरी तैयारी और होमवर्क के साथ प्रतिभाग करें ताकि सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों और समस्याओं का समयबद्ध और ठोस समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने पहाड़ में गहराते जल संकट को देखते हुए जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि मनरेगा के माध्यम से जल संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए और सूख रहे जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए अनिवार्य रूप से कार्य योजना बनाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने वनाग्नि की रोकथाम और स्थानीय आजीविका को जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल का जिक्र करते हुए कहा कि चीड़ की पत्तियों (पीरुल) का संग्रह कर उसे वन विभाग को सौंपा जाए। वन विभाग द्वारा ग्रामीणों से 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से पीरुल की खरीद की जाएगी, जिससे न केवल वनों की सुरक्षा होगी बल्कि ग्रामीणों की आय भी बढ़ेगी।

सदन की कार्यवाही के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल सड़कों और पेयजल किल्लत का मुद्दा गरमाया रहा। ग्राम प्रधान चोपड़ियाल गांव विनोद डबराल ने एनएच-707 पर बंद पड़ी नालियों के कारण बरसात में होने वाले जलभराव की समस्या रखी। वहीं ग्राम प्रधान मंज्यूड रानी नेगी ने एनएच-34 पर टनल निर्माण के कारण एक दंपत्ति के मकान को हुए खतरे का मामला उठाया। इसके अलावा गुल्डी क्षेत्र में बीआरओ द्वारा बनाए गए डंपिंग जोन से बरसात में मिट्टी खिसकने की गंभीर समस्या से भी सदन को अवगत कराया गया।
पेयजल समस्याओं को लेकर भी सदन में तीखी चर्चा हुई। ग्राम प्रधान बनाली, ग्वाड विजेंद्र सकलानी, सुदाड़ा, जसपुर और पाटा के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों में पानी की कमी का रोना रोया। प्रधान जसपुर ने क्षतिग्रस्त पुरानी लाइनों को बदलने की मांग की। पाटा गांव के कुलानंद चमोली ने पानी में मिट्टी आने और टैंकों की सफाई न होने की शिकायत दर्ज कराई, जबकि क्षेत्र पंचायत सदस्य सावित्री रावत ने लावाधार में तीन दिनों से आपूर्ति ठप होने की बात कही। जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि पंपिंग योजनाओं को दुरुस्त कर 24 घंटे जलापूर्ति के प्रयास किए जा रहे हैं।

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