उत्तराखंड । उत्तराखंड का लोकपर्व इगास-बग्वाल शनिवार को श्रीनगर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर नगर क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर ढोल-दमाऊ की थाप पर पारंपरिक भैलो खेला गया। वहीं दूसरी ओर वीरभड माधों सिंह भंडारी की कर्मस्थली मलेथा गांव में इगास पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर ढोल दमाऊ की थाप पर लोगों ने जमकर भैलो खेला। मलेथा में आयोजित इगास-बग्वाल कार्यक्रम में पहुंचे देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने जमकर भैलो खेला।
इस मौके पर विधायक विनोद कंडारी ने कहा कि दीपावली के 11 दिन बाद उत्तराखंड में लोकपर्व इगास बग्वाल मनाया जाता है। कहा कि इगास को गढ़वाल की विजय के रूप में भी देखा जाता है। जब तिब्बत सीमा पर गढ़वाल के वीर भड़ माधो सिंह भंडारी अपनी रियासत को बचाने के लिए लड़ रहे थे। इस युद्ध में विजय होकर वह दीपावली के 11 दिन बाद अपने घर मलेथा पहुंचे थे।
ऐसे में उनकी सकुशल वापसी की खुशी में इस दिन लोगों ने दीये जलाएं और गांव में उत्सव मनाय। कहा कि वीर भड़ माधो सिंह भंडारी की विजय को हर साल इगास के रूप में मनाया जाता है। वहीं नगर निगम क्षेत्रांतर्गत इगास के अवसर पर श्रीनगर के रामलीला मैदान और लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में भेलो कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्थानीय लोगों ने पारंपरिक रूप से चीड़ की लकड़ियों से भेलो जलाकर लोकपर्व मनाया।
श्रीनगर के रामलीला मैदान में भागीरथी कला संगम मंच की ओर से भेलो कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान चीड़ की लकड़ी से तैयार भेलो जलाकर पारंपरिक नृत्य किया गया। उधर, लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में शैलनट संस्था द्वारा आयोजित इगास भेलो खेलो कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बना रहा।
लोकसंस्कृति को संजोए पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर लोग थिरकते हुए एक-दूसरे को बग्वाल की बधाई देते नजर आए। मौके पर राजेंद्र बर्तावाल, दीपक उनियाल, विमल बहुगुणा, मुकेश नौटियाल, मदन गढ़ोई सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
