गोपेश्वर में गूँजे महायोगी श्रीअरविन्द के जीवन दर्शन के मनस्वी मंत्र

चमोली। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर में शुक्रवार को महर्षि श्रीअरविन्द के जीवन और विरासत पर प्रेरक मंथन हुआ। महाविद्यालय के अँग्रेजी विभाग के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में अलग अलग वक्ताओं ने श्री अरविन्द के जीवन, कर्म और संदेश की मीमांसा की।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य प्रो. एमपी नगवाल ने कहा कि महर्षि अरविंद पूर्ण स्वराज की खुली उद्घोषणा करने वाले पहले भारतीय थे।  वे  महान क्रांतिकारी, दार्शनिक, कवि और योगी के साथ साथ आध्यात्मिक गुरु भी थे जिनका प्रभाव नए भारत की रचना में धीरे धीरे परिलक्षित हो रहा है।
आमंत्रित वक्ता डॉ मनीष मिश्रा ने कहा कि श्री अरविन्द के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब वह आंतरिक मुक्ति से जुड़ी हो। डॉ सौरभ कुमार ने आधुनिक विश्व में मानव एकता की दृष्टि तथा अरविन्द के विचारों को सामूहिक विकास और संस्कृतियों के बीच सामंजस्य हेतु प्रासंगिक बताया।
डॉ डी.एस. कंडारी ने श्रीअरविन्द के काव्य में राष्ट्र और मान्यता की चेतना विषय पर उनके काव्य में आध्यात्मिकता, राष्ट्रप्रेम और मान्यता के संगम को रेखांकित किया। शिक्षाशास्त्री और बीएड विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर कुलदीप सिंह  ने “समग्र शिक्षा की अवधारणा” विषय पर बोलते हुए श्री अरविन्द के शिक्षा दर्शन और व्यक्तित्व के पाँच आयाम—शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक को आधुनिक शिक्षा में महत्वपूर्ण बताया।
इसके पश्चात डॉ. जे.एम.एस. नेगी और डॉ. दिनेश सती ने महायोगी के आलोक पर अपने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।लोक संस्कृति के अध्येता और अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. डी.एस. नेगी ने अध्यक्षीय भाषण में श्रीअरविन्द साहित्यिक और दार्शनिक योगदान पर प्रकाश डाला।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के सूत्रधार और कार्यक्रम संयोजक डॉ. दिनेश सिंह रहे जो वर्तमान में श्री अरविन्द पर पीएच.डी. कर रहे हैं । डॉ. सिंह ने पांडिचेरी यात्रा के बारे में अपने आध्यात्मिक अनुभव साझा किए।
इस अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कनिष्का दानू, द्वितीय स्थान यशवंत तथा तृतीय स्थान आर्यनशिखा ने प्राप्त किया। तीनों विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।

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