गौरीकुंड में पैदल मार्ग बंद, 2900 यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू

उत्तराखंड। उत्तराखंड में आसमानी आफत एक बार फिर कहर बनकर टूटी है। केदारनाथ यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है। गौरीकुंड के पास देर रात एक पहाड़ी टूटने से केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग बाधित हो गया, जिससे यात्रा को तुरंत प्रभाव से रोका गया।
25 जुलाई की रात करीब साढ़े तीन बजे गौरीकुंड के पास अचानक पहाड़ी दरक गई। इस भूस्खलन से पैदल मार्ग पूरी तरह ठप हो गया। सैकड़ों तीर्थयात्री मार्ग में फंस गए। बोल्डरों और मलबे के चलते न आवागमन हो पाया और न ही रेस्क्यू संभव था।

मुस्तैदी से किया गया रेस्क्यू ऑपरेशन
सुबह से ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस बल के जवानों ने राहत कार्य शुरू किया। दोपहर करीब 1 बजे रास्ता पैदल चलने योग्य बनाया गया, जिसके बाद केदारनाथ से लौट रहे 2900 यात्रियों को सुरक्षित गौरीकुंड पहुंचाया गया। राहत की बात यह रही कि किसी तरह की जनहानि या पशुहानि नहीं हुई। पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल गौरीकुंड से आगे यात्रा रोकी गई है। जब तक मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक यात्रियों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मौके पर आपदा प्रबंधन, पुलिस और राहत टीमें तैनात हैं।

रुद्रप्रयाग में कहर बरपा रही बारिश
उधर, रुद्रप्रयाग जिले के कई इलाकों में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। चमेली, रूमसी, चमरारा तोक, विजयनगर, सौड़ी गदेरा और बेडू बगड़ नाले में भारी पानी और मलबा आने से कई घरों और गौशालाओं में मलबा घुस गया। संपर्क मार्गों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मार्ग को फिर से सामान्य बनाने के प्रयास तेज़ कर दिए गए हैं।

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