रामायण संबंधों का ग्रन्थ है जिसमें बिभिन्न संबंधों को प्रेरणा दी है, श्रवण की महिमा ग्रन्थों ने गायी है

 

गौचर/चमोली ।  यह बात मानस कर्णप्रयाग 919 रामकथा जिलासू में प्रसिद्ध रामकथा वाचक मोरारी बापू ने कहा कि श्रवण बिज्ञान हैं सुनना बड़ा बिज्ञान हैं कान दो श्रवण एक है जहां से सत्य मिलता उसका भजन करना ना भूले ।

राम कथा करते हुए मोरारी बापू ने बताया कि राम राज्य स्थापित करने में सात बाधायें आयी जिसको कि एक एक कर राम ने पार किया। जिसमें ताडका मारीच सुबाहू बध शिव धनुष खंडन फरशुराम क्रोध, सूर्पनखा की कपटता खर दूषण वध और सातवींऔर अंतिम बाधा रावण का मोह लोभ का अंत तथा आज जनकपुरी में भ्रमण करने जनक पुष्पवाटीका से गुरु बिश्ववामित्र की पूजा को पुष्प लाने सखियों के संग जगत जननी सीता का गौरी पूजन शिव के धनुष को तोड़ने सीता राम विवाह जनक पुरी से अयोध्या के लिए बिदायी अयोध्या में चारों दंपतियों का स्वागत और अयोध्या से बिश्ववामित्र की बिदाई सहित अनेकों प्रसंगों को बताया।

आज रामकथा में जिलासू की महिलामंगलदल ने रामलीला के कुछ संवाद मोरारी बापू के सम्मुख मंचन किया गया जिसमें रावण राजा दशरथ अंगद के पात्रों ने अपना प्रस्तुत किया पतंजलि की बहन लक्ष्मी शाह ने अयोध्या में होने वालें रामलीला का भी बुलावा बापू को दिया। कार्यक्रम का संचालन हरीश चन्द्र त्रिपाठी ने किया

आज मुख्य रूप से राजेश्वरी पंवार, बीरा फर्स्वाण, लक्ष्मी शाह, कुंवर गजेन्द्र सिंह, सतुआ बाबा, सूर्यकांत जालान, रेनू जालान, नर नारायण जालान, लक्ष्मी जालान, प्रभूकान्त डिमरी, राजेन्द्र पुरोहित, गिरीशचंद्र त्रिपाठी, हरीश चंद्र त्रिपाठी के अलावा आस पास गांवों बाजारों कस्बों शहरों से आये श्रद्धालु भक्त ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया

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