जल संसाधन विकास की योजनाओं की प्रगति से जल शक्ति मंत्रालय को अवगत कराया: सतपाल महाराज

नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में शामिल हुए कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड में पेयजल, सिंचाई और जल संरक्षण कार्यों की दी जानकारी

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड के सिंचाई, लोक निर्माण, ग्रामीण निर्माण, पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने विकसित भारत-2047 के विजन के तहत उत्तराखंड में जल संसाधन विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और उनके कार्यों की प्रगति से मंत्रालय को अवगत कराया।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तराखंड के नागरिकों को स्वच्छ एवं सुुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने, कृषि योग्य भूमि में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, भूजल रिचार्ज, जल संरक्षण तथा पर्यटन समेत विभिन्न क्षेत्रों में जल संसाधनों के विकास को लेकर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

उत्तराखंड में 3142 लिफ्ट नहरें और 1774 नलकूप

सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि उत्तराखंड में वर्तमान में कुल 3142 लिफ्ट नहरें और 1774 नलकूप हैं। इनके माध्यम से कुल 4,24,200 हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, जबकि कुल सिंचन क्षमता 5,49,000 हेक्टेयर है।

उन्होंने बताया कि राज्य के प्रमुख शहर देहरादून और आसपास के क्षेत्रों की वर्ष 2051 तक अनुमानित लगभग 11 लाख आबादी को प्रतिदिन 150 मिलियन लीटर सुनिश्चित पेयजल आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए गंगा नदी की सहायक सॉन्ग नदी पर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर 133 मीटर ऊंचे सॉन्ग बांध का निर्माण प्रस्तावित है।

इस बांध के निर्माण से करीब 3.65 किलोमीटर लंबी झील का निर्माण होगा। परियोजना को नवंबर 2029 तक पूरा करने का प्रस्ताव है।

हल्द्वानी के लिए जमरानी बांध महत्वपूर्ण

सतपाल महाराज ने बताया कि हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों की वर्ष 2051 तक अनुमानित लगभग 10 लाख 65 हजार आबादी को प्रतिदिन 117 मिलियन लीटर सुनिश्चित पेयजल आपूर्ति उपलब्ध कराने के साथ-साथ नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और उत्तर प्रदेश के बरेली व रामपुर जिलों के कुल 57,065 हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रामगंगा नदी की सहायक गौला नदी पर हल्द्वानी से करीब 10 किलोमीटर अपस्ट्रीम में 150.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी जमरानी बांध का निर्माण प्रस्तावित है।

उन्होंने बताया कि जमरानी बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 208.60 है और इस परियोजना को जून 2029 तक पूरा करने का प्रस्ताव है।

गैरसैंण बांध से पेयजल आपूर्ति की योजना

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण तथा उसके आसपास के गांवों में सुनिश्चित पेयजल आपूर्ति के लिए रामगंगा नदी पर गैरसैंण बांध के निर्माण का प्रस्ताव है। इसके साथ ही अन्य आबादी वाले क्षेत्रों में भी सुनिश्चित पेयजल आपूर्ति के लिए कई बांध एवं बैराज परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।

‘कैच द रेन’ अभियान के तहत जल संरक्षण पर जोर

सतपाल महाराज ने बताया कि ‘कैच द रेन’ कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, जल संचय एवं स्रोत संवर्धन की दिशा में उत्तराखंड में विशेष अभियान चलाया गया है। इसके तहत प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जल संचय संरचनाओं, चाल-खाल, चेक डैम, रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग आदि सहित कुल 4,998 संरचनाओं का निर्माण किया जाना है। इनमें से 3,980 संरचनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष 1,016 संरचनाओं का निर्माण कार्य जारी है।

मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि राज्य सरकार जल संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और उनके बेहतर उपयोग के लिए लगातार कार्य कर रही है। जल सुरक्षा के साथ-साथ प्रदेश के नागरिकों को सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने और कृषि क्षेत्र की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए दीर्घकालिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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