MIKE Hydro Basin से बेसिन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग, देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ और शोधार्थी जुड़े
देहरादून। जल संसाधनों के वैज्ञानिक और टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून में सोमवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। ‘Integrated Water Resources Modeling and Basin Management Using MIKE Hydro Basin’ विषय पर आयोजित यह कार्यशाला 7 और 8 सितंबर को चलेगी।
कार्यशाला का आयोजन ICAR-IISWC, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), देहरादून और DHI India के संयुक्त तत्वावधान में जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के INCCC प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से 400 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन और ऑन-साइट हाइब्रिड माध्यम से शामिल हो रहे हैं।
प्रतिभागियों में हाइड्रोलॉजिस्ट, GIS विशेषज्ञ, शोधकर्ता, पर्यावरण वैज्ञानिक, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के संकाय सदस्य और विद्यार्थी शामिल हैं। कार्यशाला में जल संसाधन प्रबंधन के लिए आधुनिक मॉडलिंग तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मॉडलिंग से लेकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन
प्रशिक्षण के दौरान GIS डेटा प्रोसेसिंग, हाइड्रोलॉजिकल सिमुलेशन, मॉडल सेटअप, इनपुट डेटा तैयार करने, मॉडल कैलिब्रेशन-वैलिडेशन, परिदृश्य विश्लेषण और निर्णय समर्थन प्रणाली जैसे विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जा रहा है। साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में जल संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभावों और उसके अनुरूप प्रबंधन रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
आयोजन अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक (SWCE) डॉ. अमरीश कुमार ने कहा कि आधुनिक मॉडलिंग और वैज्ञानिक डेटा आधारित तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल जल संसाधनों के बेहतर नियोजन और दीर्घकालिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हिमालयी नदियों के पुनरुद्धार पर भी चर्चा
कार्यशाला के पहले दिन राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की के पूर्व वैज्ञानिक ‘जी’ एवं अध्यक्ष डॉ. आरपी पांडे ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र में नदियों के पुनरुद्धार की रणनीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नदी पुनरुद्धार के लिए वैज्ञानिक और समेकित दृष्टिकोण की आवश्यकता बताई।
इसके बाद DHI India की विशेषज्ञ टीम ने MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली, प्रोजेक्ट इनिशियलाइजेशन और विभिन्न टूल्स की जानकारी दी। NIH रुड़की के वैज्ञानिक ‘सी’ डॉ. अजय अहिरवार ने मॉडल सेटअप और आवश्यक इनपुट डेटा तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों को वास्तविक डेटा पर मॉडल सिमुलेशन, कैलिब्रेशन और वैलिडेशन की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

भूजल पुनर्भरण और ‘वॉटर पॉजिटिव लैंडस्केप’ पर फोकस
कार्यशाला में बेसिन प्रबंधन के लिए विभिन्न संभावित परिस्थितियों के Scenario Analysis और नीति एवं योजना निर्माण में Decision Support System के उपयोग पर भी चर्चा होगी। वहीं CSSRI करनाल के पूर्व निदेशक डॉ. एसके कामरा भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के डिजाइन, उपयुक्त स्थल चयन और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से ‘Water Positive Landscape’ विकसित करने के विषय पर विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक जलागम डॉ. ए.के. डिमरी, उप निदेशक SARRA डॉ. डी.एस. रावत, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश, डॉ. उदय मंडल, डॉ. रमा पाल समेत अनेक वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और प्रतिभागी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ती जल मांग, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच डेटा आधारित मॉडलिंग और वैज्ञानिक निर्णय प्रणाली भविष्य के जल प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकती है। कार्यशाला से हिमालयी एवं अन्य नदी बेसिनों के समेकित प्रबंधन, नदी पुनरुद्धार, भूजल पुनर्भरण और जल सुरक्षा के लिए प्रभावी रणनीति विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
