अपने रंग में रंगने लगा है गौचर मेला।

 

गौचर।

  • उत्तराखंड का प्रसिद्ध 70वां राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला समापन की ओर बढ़ रहा है वैसे- वैसे अपने पूरे यौवन में नजर आने लगा है।

वर्ष 1943 से गढ़वाल में चमोली जिले के गौचर में यह मेला आयोजित होते आ रहा है । यह मेला उस दौर में व्यापारिक मेले के रूप में शुरू हुआ था जब पहाड़ों में यातायात एवं संचार सुविधा नहीं थी , तब तिब्बत की मंडियों से बकरियों के माध्यम से आने वाले सामान का हाट बाजार यहां लगता था। लेकिन अब बदलते दौर में मैदानी भागों से व्यापारी यहाँ कई प्रकार के सामानों को लेकर आने लगे हैं जिसकी जमकर यहाँ खरीदारी की जाती है साथ ही यह मेला लोगों के मिलन का भी बहुत बड़ा माध्यम है ।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने से यहां आयोजित इस मेले में सभी का आना होता रहता है । मेले की पौराणिक परम्परा रही है कि अंतिम दिनों में लोगों का हूजूम उमड़ पड़ता है। यही कारण है कि अब मेले में भीड़ बढ़ने लगी है और दुकानदार भी खुश नजर आ रहे हैं।

मेला प्रशासन ने भी मेले को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। मेले में पशुपालन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, उद्यान विभाग, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, वन विभाग, उद्योग विभाग, आईटीबीपी, भारतीय सेना, पर्यटन विभाग, सहकारिता विभाग, महिला समूहों के प्रदर्शनी स्टालों सहित कई अन्य स्टालों के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है वहीं युवा वर्ग खेलकूद प्रतियोगिता में जमकर भाग ले रहे हैं ।

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