( पंडित प्रदीप लखेड़ा )
दीपावली के दो दिन बाद यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस बार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भाई दूज 2022 का त्योहार दो दिन मनाया जाएगा।कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 26 अक्टूबर बुधवार की दोपहर में लगेगी। जो 27 अक्टूबर की दोपहर तक रहेगी।
इस बार भाई दूज दो दिन मनाई जाएगी। बहनें 26 अक्टूबर की दोपहर में पूजा करने के बाद भाई को तिलक कर सकती हैं। इसके साथ जो बहनें उदया तिथि में तिलक करना चाहती हैं वे 27 अक्टूबर दिन गुरुवार को अपने भाई का तिलक करें। वैसे ज्यादा शुभ गुरुवार को ही माना जा रहा है।
भाई दूज का शुभ मुहूर्त
26 अक्टूबर को भाई दूज मनाने का शुभ मुहूर्त : दोपहर 1 बजकर 18 मिनट से दोपहर 3 बजकर 33 मिनट तक।
27 अक्टूबर को भाई दूज मनाने का शुभ मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 7 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक।
भाई दूज पर तिलक करने की विधि
इस दिन भाई को घर बुलाकर तिलक लगाकर भोजन कराने की परंपरा है।
पिसे चावल से चौक बनाएं। भाई के हाथों पर चावल का घोल लगाएं।
भाई के हाथें में कलावा बांधें।
भाई को तिलक लगाएं। फिर भाई की आरती उतारें।
भाई को मिठाई खिलाएं।
मिठाई खिलाने के बाद भाई को भोजन कराएं।
भाई को बहन को कुछ न कुछ उपहार में जरूर देना चाहिए।
ऐसा करने से भाई की नहीं होती अकाल मृत्यु।
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि के लिए उनका तिलक करती हैं। मान्यता है कि जो बहन अपने भाई के माथे पर कुमकुम का तिलक लगाती हैं, उनको सभी सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही जो भाई बहन के घर जाकर तिलक करवाता है, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती।
भाई दूज त्योहार से जुड़ी कथा
पंडित ऋषिकेश शुक्ल ने भाई दूज त्योहार से जुड़ी कथाओं के बारे में बताया। कहा, एक कथा के अनुसार सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया की दो संताने थीं, यमराज और यमुना। दोनों में बहुत प्रेम था। बहन यमुना हमेशा चाहती थीं कि यमराज उनके घर भोजन करने आया करें। जबकि यमराज उनकी विनती को टाल देते थे।
यमराज पहुंचे थे अपनी बहन यमुना के घर
लेकिन, एक बार दोपहर में यमराज उनके घर पहुंचे। यमुना अपने घर के दरवाजे पर भाई को देखकर बहुत खुश हुईं। यह तिथि कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय थी। यमराज के घर पहुंचने पर यमुना ने मन से उनका बहुत आदर सत्कार करके भोजन करवाया।
बहन यमुना ने तिलक करके यमराज को कराया था भोजन
बहन का स्नेह देखकर यमदेव ने उनसे वरदान मांगने को कहा। इस पर उन्होंने वचन मांगा कि वो हर साल इसी तिथि पर भोजन करने आएं। साथ ही मेरी तरह जो भी बहन इस दिन अपने भाई का आदर-सत्कार करे, उनका तिलक करें, उनमें यमराज का भय न हो।
यमराज ने बहन यमुना को दिया था वरदान
यमराज ने आगे से ऐसा ही होगा कहकर बहन यमुना को वरदान दिया था। तब से यही परंपरा चली आ रही है। इसलिए भाई दूज के दिन यमराज और यमुना का पूजन किया जाता है और बहनें भाई का आदर सत्कार करके तिलक लगाकर उन्हें भोजन कराती हैं।
भाई दूज की एक और कहानी
एक अन्य कहानी के मुताबिक, इस दिन भगवान कृष्ण राक्षस नरकासुर को हराने के बाद अपनी बहन सुभद्रा के पास गए थे। सुभद्रा ने फूलों की माला से उनका स्वागत किया। उनके माथे पर टीका लगाया और आरती की। इससे भाई दूज का त्योहार शुरू हुआ।
