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हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित भव्य विरासत महोत्सव-2026 का सेकेंड लास्ट-डे हुआ भरपूर संगीतमय

देहरादून : हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र नींबूवाला में आयोजित किए जा रहे भव्य विरासत महोत्सव-2026 में आज का दिन सेकेंड लास्ट-डे का रहा I गुरुवार को इस भव्य मेले में जहां अनोल चटर्जी के संगीत से विरासत की महफिल गुलो-गुलज़ार हो उठी, वहीं अन्य शास्त्रीय संगीत के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी-अपनी खूबसूरत प्रस्तुतियां देकर विरासत के आलीशान मंच को खुशबूदार बना डाला। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत राग यमन से की, जिसके बाद ठुमरी, दादरा और भजन प्रस्तुत किए।
प्रस्तुति में तबले पर शुभ महाराज, हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा और तानपुरे पर सिद्धांत प्रुथी ने संगत की। कलाकारों के बीच सुर और ताल का सुंदर सामंजस्य देखने को मिला।
विश्व विख्यात सांस्कृतिक लोक कलाकार अनोल चटर्जी के हिंदुस्तानी संगीत का अद्भुत एवं रोचक जादू सम्पूर्ण विरासत के सिर पर चढ़ कर आज ख़ूब बोला I उनके मधुर संगीत ने सभी मेहमानों को महफ़िल में जमा दिया और वहां से उठने ही नहीं दिया I
हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक, संगीतकार, संगीत निर्देशक व शिक्षक अनोल चटर्जी भारत के एक प्रतिष्ठित हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक हैं और पद्मभूषण पंडित अजय चक्रबर्ती के प्रमुख शिष्य हैं। उन्होंने विश्वनाथ चौधरी, स्वर्गीय अजीत चक्रबर्ती, चंदना चक्रबर्ती और शांतनु भट्टाचार्य से भी संगीत की शिक्षा प्राप्त की है। एक कुशल कलाकार के रूप में अनोल ने भारत-भर के कई प्रतिष्ठित संगीत समारोहों और सम्मेलनों में प्रस्तुति दी है, जिनमें आईटीसी एसआरए संगीत सम्मेलन, केसरबाई केरकर संगीत समारोह, स्वर मंगेश महोत्सव, संगीत नाटक अकादमी कॉन्सर्ट, आईसीसीआर न्यू होराइजन कॉन्सर्ट, विरासत महोत्सव और अन्य शामिल हैं। उन्होंने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, स्कॉटलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश का व्यापक दौरा किया है, जहां उन्होंने विश्व भर के श्रोताओं के सामने भारतीय शास्त्रीय और हल्का शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत किया है।
उन्होंने फेलुदा वेब सीरीज़ ‘रॉयल बंगाल रहस्य’ और ‘बेलूर मठ’ जैसी कई प्रस्तुतियों के लिए पार्श्व गायक के रूप में भी काम किया है। डॉक्यूमेंट्री ‘योगिराज श्यामचरण लाहिड़ी’ के लिए उनके संगीत निर्देशन को व्यापक सराहना मिली है।
संगीत के प्रति समर्पित अनोल वर्तमान में कोलकाता के श्रुतिनांदन स्कूल के कार्य वाहक प्रधानाचार्य हैं। उनके यूट्यूब चैनल के 70,000 से अधिक सब्सक्राइबर हैं और यह दुनिया भर के संगीत प्रेमियों तक पहुंचता है। उनके अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कार्यशालाओं में नियमित रूप से 20 से अधिक देशों के प्रतिभागी शामिल होते हैं।
उनके पहले एल्बम ‘न्यू सिग्नेचर’ का उद्घाटन दिग्गज उस्ताद जाकिर हुसैन ने किया था। पंडित रवि शंकर, उस्ताद अमजद अली खान और अरिजीत सिंह ने भी उनकी कला की सराहना की है। उनको कई प्रमुख सम्मान भी मिल चुके हैं जिनमें आदित्य बिड़ला कला किरण पुरस्कार, 2017, ⁠श्रुतिनंदन पुरस्कार, युवा कलाकारों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति, भारत सरकार ⁠’ए’ ग्रेड कलाकार, ऑल इंडिया रेडियो, सूचीबद्ध कलाकार, आईसीसीआर, भारत सरकार के अलावा विजेता, डोवर लेन संगीत प्रतियोगिता 2003, प्रथम श्रेणी में प्रथम, खयाल में मास्टर्स, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय पुरस्कार, ⁠पूर्व स्कॉलर तथा आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी पुरस्कार शामिल हैं I विरासत महोत्सव-2026 में सेकेंड लास्ट-डे पर सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत राजस्थानी प्रसिद्ध लोक नृत्य ‘कालबेलिया’ से हुई

इस भव्य और मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
बाड़मेर के लांगा ग्रुप ने राजस्थानी लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत करते हुए कालबेलिया लोक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। इस मनमोहक प्रस्तुति में कलाकार गीता, मनीषा और निशा ने अपनी आकर्षक नृत्य शैली और भावपूर्ण अभिव्यक्तियों से दर्शकों का मन मोह लिया। प्रस्तुति में हारमोनियम पर जाकिर खान, सारंगी पर दूड़े खान, ढोलक पर शौकत खान, खड़ताल पर इरफान हुसैन, डफली पर रामनाथ तथा मंजीरे पर सागर ने खूबसूरत संगत की। वहीं, गायक सलीम खान, फारूक, सोनू खान और जाकिर ने अपनी मधुर आवाज़ से प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बनाया I

जॉर्ज ब्रूक्स का विरासत में छाया रहा सुहावना संगीत और मधुरम राग-सुर
सांस्कृतिक संध्या में शाही मेहमानों ने संगीतों की बहती धारा में किया स्नान
विरासत 2026 में ‘एन इवनिंग ऑफ कॉन्फ्लुएंस’ की संगीतमय प्रस्तुति ने रंगीन कर दी महफिल
विरासत-2026 के मंच पर ‘एन इवनिंग ऑफ कॉन्फ्लुएंस’ के अंतर्गत जॉर्ज ब्रूक्स सैक्सोफोन और कला रामनाथ ने वायलिन पर एक मनमोहक व आकर्षक विशेष संगीत की मधुर और मनोरमय प्रस्तुति दी। दोनों कलाकारों के अद्भुत समागम ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और समकालीन संगीत के सुरों का बेहतरीन अंदाज से ओत प्रोत संगम प्रस्तुत करके महफ़िल में रंग बिखेर दिए।
प्रस्तुति की शुरुआत जॉर्ज ब्रूक्स की रचना पर आधारित काफ़ी ठाट से हुई और इसका समापन राग भैरवी के साथ हुआ। तबले पर शुभ महाराज ने शानदार संगत की।
देश दुनिया में ख्याति प्राप्त जॉर्ज ब्रूक्स एक पुरस्कार विजेता सैक्सोफोन वादक और संगीतकार हैं, जिन्हें जैज़ और भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया को सफलतापूर्वक जोड़ने के लिए ख्याति प्राप्त है। वे भारतीय फ़्यूज़न संगीत के कई महत्वपूर्ण समूहों के संस्थापक हैं, जिनमें ज़ाकिर हुसैन, काई एकहार्ट, स्टीव स्मिथ और फरीद हक के साथ समिट, पंडित हरिप्रसाद चौरासिया के साथ किरवानी चौकड़ी, कला रामनाथ और डच वीणा वादक ग्वेनेथ वेंटिंक के साथ एलिमेंट्स और कई अन्य शामिल हैं। ज़ाकिर हुसैन के मोमेंट रिकॉर्ड्स पर रिलीज़ हुए उनके एल्बम “लास्टिंग इम्प्रेशन” और “नाइट स्पिनर”, और अर्थ ब्रदर म्यूज़िक के लिए बाद में रिलीज़ हुए “समिट” और “स्पिरिट एंड स्पाइस” को जैज़ और भारतीय शास्त्रीय संगीत के संगम के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य माना जाता है।
यही नहीं, ब्रूक्स ने काउंट बेसी के सैक्सोफोन वादक फ्रैंक फोस्टर से जैज़ का अध्ययन शुरू किया और न्यू इंग्लैंड कंज़र्वेटरी ऑफ़ म्यूज़िक में जॉर्ज रसेल, जो एलार्ड और जैकी बायर्ड के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। 1980 में ब्रूक्स ने भारत की यात्रा की, जहाँ उनकी मुलाकात किराना घराना के गायक पंडित प्राण नाथ से हुई और उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार भारतीय शास्त्रीय संगीत का अध्ययन शुरू किया।
लगभग 25 वर्षों तक ब्रूक्स ने हिंदुस्तानी, कर्नाटक और लोक संगीत परंपराओं के कलाकारों के साथ पूरे भारत में प्रदर्शन किया है। ब्रूक्स भारत, एशिया और यूरोप के विभिन्न स्थानों पर नियमित रूप से प्रस्तुतियाँ देते रहे हैं।

एलिमेंट्स’ ग्रुप में, कला रामनाथ ने दुनिया के मशहूर सैक्सोफोन वादक जॉर्ज ब्रूक्स और डच हार्प वादक ग्वेनेथ वेंटिंक के साथ मिलकर काम किया।
वायलिन वादक कला रामनाथ ने बिछा दी वायलिन की “मनमोहक बिसात”
अपनी शास्त्रीय संगीत की मधुर कला से मशहूर शख्सियत कला रामनाथ एक भारतीय शास्त्रीय वायलिन वादक हैं। वे संगीतकारों की एक प्रतिष्ठित मेवाती घराना परंपरा से संबंध रखती हैं।
उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, राष्ट्रीय कुमार गंधर्व सम्मान और पंडित जसराज गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। संगीत परिवार से ताल्लुक रखने वाली कला रामनाथ ने अपने दादा नारायण अय्यर से वायलिन और गायन की शिक्षा प्राप्त की। वे वायलिन वादकों की सातवीं पीढ़ी की शुरुआत का प्रतिनिधित्व करती हैं। कला रामनाथ ने भारत के सभी प्रमुख संगीत समारोहों के साथ-साथ विश्व भर के सबसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी प्रस्तुति दी है। उन्होंने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत, जैज़, फ्लेमेंको और पारंपरिक अफ्रीकी संगीत के तत्वों को समाहित करते हुए विश्व भर के विभिन्न विधाओं के प्रख्यात कलाकारों के साथ संगीतमय सहयोग स्थापित किया है। कला रामनाथ लंदन सिम्फनी और लंदन फिलहारमोनिक जैसे ऑर्केस्ट्रा के साथ काम करने और प्रयोग करने के लिए एक लोकप्रिय कलाकार हैं। कला रामनाथ ने हॉलीवुड फिल्मों के बैकग्राउंड स्कोर में भी योगदान दिया है, जिनमें ब्लड डायमंड उल्लेखनीय है। कला रामनाथ नियमित रूप से विश्व भर में व्याख्यान और कार्यशालाओं का आयोजन करती हैं। उनका संस्थान, ‘कलाश्री’, वंचित बच्चों के साथ काम करता है।

विरासत महोत्सव-2026 में 14 दिन का मधुर व मनमोहक सफ़र हुआ पूरा, मात्र एक दिन रहा शेष
फूड कोर्ट में भिन्न-भिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टालों पर भरपूर आनंद ले रहे हैं विरासत के शाही मेहमान
शास्त्रीय सांस्कृतिक संगीतों का भव्य आनन्द लेने, खरीदारी करने और फूड कोर्ट में अब तक लाखों लोग ले चुके हैं स्वादिष्ट व्यंजनों का भरपूर स्वाद
विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त संस्था “रीच” द्वारा उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून के नींबू वाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित किये जा रहे 15 दिवसीय विशाल एवं बेहतरीन आकर्षक तथा शाही अंदाज़ वाले विरासत महोत्सव-2026 में आज 14 दिन का भव्य एवं खुशनुमा वातावरण संपूर्ण हो चुका है I इस विरासत महोत्सव में न सिर्फ भारतीय शास्त्रीय संगीत की कई नामी संगीतकार हस्तियों द्वारा दी गई शानदार और अद्भुत प्रस्तुतियों का आनंद लिया गया, वहीं खरीदारी करने का भी जोश-जुनून विरासत के इस भव्य और शाही बाज़ार में नजर आया I विरासत महोत्सव में विशाल सुसज्जित और रोशनी से नहाए हुए विशाल फूड कोर्ट में भी अब तक इन 14 दिनों में लाखों विरासत के शाही मेहमान भिन्न-भिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों का भरपूर स्वाद लेकर विरासत महोत्सव को खुशहाली के पायदान पर ले जा चुके हैं I दिलचस्प यह है कि फूड कोर्ट में समूचे भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजनों का प्रतिदिन लाखों शाही लोग बेशुमार एवं खुशगवार स्वाद ले चुके हैं I गुजरात, दिल्ली, जयपुर, हिमाचल,राजस्थान,उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टाल पर खानपान का स्वाद लेने के लिए प्रतिदिन खासी भीड़ देखी गई इसके अलावा आकर्षण फर्नीचर एवं साज सज्जा का हर सामान इस शाही विरासत महोत्सव में मौजूद है इनकी भी खरीदारी जमकर की जा रही है I सामान की खरीदारी करने के लिए लोगों में भारी उत्साह, उमंग और जुनून निरंतर बना हुआ है I

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