गौचर। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 8वीं वाहिनी में योग और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का विशेष संदेश दिया गया। ‘योगा फॉर हेल्दी एजिंग’ थीम के तहत आयोजित कार्यक्रम में हिमवीरों, अधिकारियों, एनडीआरएफ जवानों और उनके परिवारजनों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
8वीं वाहिनी के परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व सेनानी मनोहर सिंह रावत के निर्देशन में किया गया। योग सत्र में आयुष शिक्षा विभाग, उत्तराखंड के योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया। साथ ही योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि केवल वाहिनी मुख्यालय ही नहीं, बल्कि दुर्गम एवं विषम जलवायु वाले अग्रिम चौकियों पर तैनात आईटीबीपी के जवानों ने भी स्थानीय नागरिकों के साथ योगाभ्यास किया। इसके माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता और योग के महत्व का संदेश पहुंचाया गया।
इस अवसर पर सेनानी मनोहर सिंह रावत ने कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो उम्र, जाति, धर्म और राष्ट्रीय सीमाओं से परे पूरी मानवता को जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि योग शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित कर व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाता है।

उन्होंने हिमवीरों और उनके परिवारजनों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा समाज में इसके महत्व को प्रसारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और सकारात्मक मानसिकता किसी भी चुनौती का सामना करने की सबसे बड़ी शक्ति है।
आईटीबीपी द्वारा समय-समय पर सैनिकों और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय एवं सौहार्द बढ़ाने के लिए विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का यह आयोजन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा, जिसने सीमांत क्षेत्रों में स्वास्थ्य, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया।
