देहरादून में पहली बार ब्लूबेरी खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू, 10 किसानों को मिलेगा 80% अनुदान

 

देहरादून।  कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में Dehradun जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है। जिलाधिकारी Dr. Ashish Chauhan के नेतृत्व में जनपद में पहली बार ब्लूबेरी खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। यह पहल मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देशन में संचालित की जा रही है, जिसके तहत उच्च मूल्य वाली फसलों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

 

सहसपुर क्षेत्र चुना गया पायलट प्रोजेक्ट के लिए

 

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि उद्यान विभाग द्वारा Sahaspur क्षेत्र की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद इसे ब्लूबेरी उत्पादन के लिए उपयुक्त पाया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत सहसपुर ब्लॉक के 10 किसानों का चयन किया गया है, जिन्हें तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।

80 प्रतिशत अनुदान पर मिलेंगे 500 पौधे

 

चयनित किसानों को 500 वर्गमीटर क्षेत्र में खेती के लिए 500 ब्लूबेरी पौधे 80 प्रतिशत अनुदान पर दिए जाएंगे। इसके साथ ही वैज्ञानिक खेती, पौधों के रखरखाव, सिंचाई प्रबंधन और उन्नत उत्पादन तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। जिला प्रशासन किसानों की उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य करेगा, ताकि उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सके।

 

क्लस्टर स्तर पर विस्तार की योजना

 

जिलाधिकारी ने कहा कि यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में इसे क्लस्टर स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। इससे देहरादून को ब्लूबेरी उत्पादन के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ‘दून बासमती’ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है, उसी तरह ब्लूबेरी भी किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकती है।

1,000 से 1,500 रुपये प्रति किलो तक बाजार मूल्य

 

मुख्य उद्यान अधिकारी D. K. Tiwari ने बताया कि ब्लूबेरी एक हाई-वैल्यू फसल है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 1,000 से 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और एंटीऑक्सीडेंट युक्त फलों की मांग में वृद्धि के कारण इसकी व्यावसायिक संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

 

उन्होंने जानकारी दी कि National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड) के सहयोग से चयनित गांवों में पॉलीहाउस स्थापित किए जाएंगे, जिनमें ब्लूबेरी की खेती की जाएगी। ब्लूबेरी के पौधे लगभग दो वर्षों में फल देना शुरू कर देते हैं। विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल 10 किसानों ने इस खेती को अपनाने की इच्छा जताई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नवाचार आधारित ऐसी योजनाएं किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अधिक आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करेंगी। साथ ही इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र में आधुनिक एवं लाभकारी खेती को बढ़ावा मिलेगा।

 

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