वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत स्थानीय किसानों को मिला नया बाजार आठवीं वाहिनी गौचर में ताजे फल एवं सब्जियों की पहली आपूर्ति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूती का आधार

गौचर (चमोली).

सीमांत एवं ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और स्थानीय उत्पादकों को प्रोत्साहित करने की दिशा में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उत्तराखंड औद्योगिक परिषद एवं आईटीबीपी के मध्य हुए समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) के तहत दिनांक 18 मई 2026 को आठवीं वाहिनी, गौचर में स्थानीय स्तर पर उत्पादित ताजे फल एवं सब्जियों की पहली आपूर्ति सफलतापूर्वक करवाई गई। इस पहल को स्थानीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।

 मनु महाराज, महानिरीक्षक, उत्तरी फ्रंटियर मुख्यालय (देहरादून) के निर्देशन में स्थानीय उत्पादों को बड़े संस्थागत बाजारों से जोड़ने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले किसानों, बागवानों एवं स्थानीय उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना तथा उन्हें स्थायी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

इस योजना के अंतर्गत स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित ताजे फल एवं सब्जियों को सीधे आईटीबीपी जैसी बड़ी संस्थाओं तक पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता और पहचान को भी नया मंच प्राप्त होगा।

इस अवसर पर  मनोहर सिंह रावत, सेनानी, आठवीं वाहिनी, गौचर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम सीमांत क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय किसानों एवं उत्पादकों को सीधे बाजार और आईटीबीपी जैसे बड़े संस्थानों से जोड़ना एक दूरदर्शी पहल है, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे पलायन जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से सरकार द्वारा सीमांत गांवों को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह पहल एक सकारात्मक और प्रेरणादायी कदम साबित हो रही है।

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