देहरादून। सरदार भगवान सिंह विश्वविद्यालय (एसबीएस विश्वविद्यालय) में आयोजित सरदार गुरचरण सिंह मेमोरियल 17वीं राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस प्रतिष्ठित आयोजन में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय “कृत्रिम बुद्धिमत्ता का युग प्रतिभा और नेतृत्व के अर्थ को पुनर्परिभाषित कर रहा है” रहा, जिस पर प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता के लिए 80 से अधिक टीमों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 46 टीमों का चयन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कुलपति प्रो. (डॉ.) जे. कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि एआई के इस दौर में प्रतिभा का अर्थ केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिज्ञासा, विश्लेषण क्षमता और सही प्रश्न पूछने की योग्यता पर आधारित है। उन्होंने नेतृत्व में नैतिकता और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. अजय कुमार ने कहा कि आधुनिक युग में प्रतिभा तकनीकी दक्षता से आगे बढ़कर रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और करुणा पर आधारित हो गई है। उन्होंने एआई को मानव विचारों का प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी बताया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. एस. फारूक ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि वर्तमान समय ‘ज्ञान’ से अधिक ‘विचार’ का है, जहां कल्पनाशीलता और नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रतियोगिता में वैशाली सिंह और आरुषि मैकुरी (एसबीएस विश्वविद्यालय) को सर्वश्रेष्ठ टीम का पुरस्कार प्रदान किया गया। अंग्रेजी श्रेणी में वैशाली सिंह और राजश्री (दून विश्वविद्यालय) संयुक्त रूप से प्रथम रहे, जबकि हिंदी श्रेणी में आदित्य कीर्ति (हिंदू कॉलेज) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
निर्णायक मंडल में शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। कार्यक्रम के अंत में वाद-विवाद समिति की संयोजक डॉ. मेघना वधवा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस आयोजन ने एक बार फिर एसबीएस विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता और बौद्धिक संवाद को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
