नई टिहरी। जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित साप्ताहिक जनता दरबार में दूर-दराज से आए फरियादियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान जिलाधिकारी ने आम जनमानस की शिकायतों को पूरी गंभीरता के साथ सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के कड़े निर्देश दिए। जनता दरबार में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पेयजल, पुनर्वास, सड़क, मुआवजा और भूमि विवाद से जुड़े कुल 45 आवेदन पत्र प्राप्त हुए, जिन पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेष रूप से पुनर्वास और पेयजल किल्लत के मामलों पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त लहजे में समस्याओं का समाधान करने को कहा।
ृ जनता दरबार में ग्राम डिबनू के निवासी संजय चौहान, अमित चौहान और जयपाल चौहान ने पुनर्वास विभाग की लचर कार्यप्रणाली को उजागर करते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पात्रता के आधार पर उन्हें रायवाला (प्रतीतनगर) में आवासीय भूखंड संख्या 10, 11 और 12, जिनका क्षेत्रफल 200-200 वर्गमीटर है, आवंटित किए गए थे। इन भूखंडों की निर्धारित कीमत भी उनके द्वारा सरकारी खजाने में जमा कर दी गई है, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें आज तक भूखंडों का भौतिक कब्जा नहीं मिल पाया है। इस मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने प्रभारी अधिकारी पुनर्वास को तत्काल आवश्यक कार्यवाही करते हुए प्रार्थियों को कब्जा दिलाने के निर्देश दिए।
मुआवजे और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में भी फरियादियों ने अपनी बात रखी। विकासखंड जाखणीधार के ग्राम खिटबड़ी निवासी बद्री प्रसाद मिश्र ने चौंडी-सेमलासू मोटर मार्ग के निर्माण के दौरान अधिग्रहित किए गए खेतों का मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई। वहीं, ग्राम सैजी, कैम्प्टी फॉल निवासी अभिषेक रावत ने लखवाड़ बांध परियोजना निर्माण में अधिग्रहित भूमि के प्रतिकर हेतु निरीक्षण प्रपत्र में नाम जोड़ने की मांग की। इन दोनों ही मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) को जांच कर आख्या उपलब्ध कराने और नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
पेयजल संकट को लेकर विकासखंड थौलधार के ग्राम रमोलसारी निवासी कमल सिंह चौहान ने बताया कि उनके गांव का पेयजल स्रोत बनस्थूल गांव के नीचे स्थित है, जो अब भूस्खलन की जद में आ चुका है। ग्रामीणों के अथक प्रयासों के बावजूद गांव तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
