बौराड़ी स्टेडियम में सांस्कृतिक संध्या का आगाज, दर्शकों की फरमाइश पर देर रात तक चला लोकगीतों का दौर

नई टिहरी। जिला मुख्यालय स्थित बौराड़ी स्टेडियम में आयोजित त्रिवेणी कौथिग की पहली सांस्कृतिक संध्या पूरी तरह से लोक संस्कृति और संगीत के नाम रही। इस भव्य आयोजन की पहली रात का आकर्षण उत्तराखंड के जागर सम्राट और पद्मश्री प्रीतम भरतवाण रहे, जिनके जादुई कंठ से निकले गीतों और जागरों ने नई टिहरी के दर्शकों को रात भर झूमने पर मजबूर कर दिया।

 

कड़ाके की ठंड के बावजूद पंडाल में दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था। प्रीतम भरतवाण ने भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया और एक के बाद एक उनकी फरमाइश पर अपनी सुपरहिट प्रस्तुतियां दीं। विशेष रूप से जब उन्होंने “ध्याणि बल काटि ते असीना..”, “किमसारी हाट मां..”, “सुंदरा छोरी..” और “गजिमाला..” जैसे लोकप्रिय गीत गाए, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और युवा दर्शक अपने स्थान पर खड़े होकर नृत्य करने लगे।

 

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय और नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर विधायक किशोर उपाध्याय ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मेले केवल मनोरंजन का साधन नहीं होते, बल्कि ये समाज में आपसी मेलजोल बढ़ाने और हमारी समृद्ध संस्कृति के आदान-प्रदान का एक सशक्त माध्यम भी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार मेलों और लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

 

उन्होंने मौजूद लोगों से अपील की कि वे हिमालयी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयास करें और भरोसा दिलाया कि मेला संचालन के लिए हर संभव मदद दी जाएगी। वहीं, पालिकाध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई टिहरी में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक स्मृतियों को जनमानस के पटल पर चिरस्थाई बनाए रखना है। उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष इस मेले को और भी भव्य और विशाल रूप दिया जाएगा।

 

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत प्रीतम भरतवाण ने धार्मिक आस्था के प्रतीक “शिव संध्या”, “मां भगवती” और “नारैणी मेरी माता भवानी..” जैसे पारंपरिक जागरों से की, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद उन्होंने भावनाओं से ओतप्रोत गीत “सेरा हिट गैल्याणी”, “तुम्हारी खुद मां..”, “हम कुशल छौंउ मांजी..” और “सरूली मेरू जिया लगीगे..” गाकर दर्शकों को भावुक कर दिया। “बांद अमरावती..” सहित कई अन्य सुपरहिट एल्बम के गीतों ने शाम को यादगार बना दिया। प्रीतम के साथ उनकी टीम के वाद्ययंत्र कलाकारों ने भी संगत देते हुए समा बांध दिया। कार्यक्रम के दौरान विधायक और पालिकाध्यक्ष ने प्रीतम भरतवाण को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। मंच का संचालन राकेश प्रसाद बधानी और गजेंद्र नौटियाल ने कुशलतापूर्वक किया।

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