‘विश्व मधुमक्खी दिवस-2025’ पर केवीआईसी के केंद्रीय कार्यालय में ‘स्वीट क्रांति उत्सव’ का हुआ आयोजन

 कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने सीईओ केवी के रूप में रैश की उपस्थिति में किया।

 राष्ट्रपति केवीवैज्ञानिक ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘स्वित क्रांति’ ने अंबेडकर के पालकों और किसानों का जीवन बदल दिया।

केवी वैज्ञानिकों के ‘हनी मिशन’ के तहत अभी तक 20,000 मिलियन टन से अधिक का उत्पादन हुआ, जिससे 325 करोड़ रुपये की आय हुई।

दिल्ली: खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म एवं लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार ने जीपीएस को इरला रोड, विले पार्ले मुंबई (पश्चिम) में स्थित अपने केंद्रीय कार्यालय में ‘विश्व शिक्षा दिवस-2025’ के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस वर्ष की थीम थीम – “प्रकृति से प्रेरित होकर, सात्विक जीवन की पोषक” (मधुमक्खी हम सभी को पोषण देने के लिए प्रकृति से प्रेरित है) पर आधारित थी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण “श्वेत क्रांति से मधुर क्रांति” के अभियान को बढ़ावा देती है। इस अवसर पर महाराष्ट्र के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आये शिक्षक-शिक्षिकाओं, शैक्षणिक संस्थानों, शिक्षकों, छात्रों और विशेषज्ञों की उपस्थिति में एक-एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि मनोज कुमार ने अपनी कविता में कहा, “मधुमखियां हमारे चमत्कारी तंत्र के प्रतीक हैं। ये न केवल शहद उगते हैं, बल्कि हमारी खेती को समृद्ध करते हैं और पर्यावरण का संरक्षण करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘हनी मिशन’ की शुरुआत हुई है, जो आज की खेती का बड़ा आधार बन गया है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने जब ‘स्वित क्रांति’ की खोज की थी, तब उन्होंने एक नया रास्ता दिखाया था; जिसमें शहद उत्पादन न केवल आर्थिक समृद्धि का, बल्कि स्वास्थ्य समृद्धि का भी स्रोत बना।

राष्ट्रपति केवीवैज्ञानिकों ने विशेष रूप से केवीवैज्ञानिकों के ‘हनी मिशन’ की सामग्री की रचना की, जिसमें कहा गया कि केवीवैज्ञानिकों द्वारा अब तक 2,29,409 गायकों और मधु कॉलोनियों की आपूर्ति की जा चुकी है, जिससे लगभग 20,000 लाख टन शहद का उत्पादन हुआ है। इन हाईस्कूल पालकों की लगभग 325 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में हनी मिशन से जुड़े श्रीकांत पालकों ने करीब 25 करोड़ रुपये का किराया विदेश में शामिल किया है।

इस परवी के सीईओ असिस्टेंट के रूप में राइस ने भी काम का खुलासा किया। उन्होंने कहा, “हनी मिशन सिर्फ एक योजना नहीं है, बल्कि यह एक समग्र मॉडल है। आज ग्रामीण इलाकों में हजारों युवाओं, महिलाओं और किसानों को इस मिशन से रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हनी मिशन प्लांट्स, ट्रेनिंग सेंटर और मार्केटिंग नेटवर्क द्वारा संचालित कीवी ने आत्मनिर्भरता की दिशा में शिक्षा दी है।

कार्यक्रम में सेंट्रल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (सीबीआरटीआई), पुणे की ऐतिहासिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि वर्ष 1962 में स्थापित इस संस्थान ने आज तक 50,000 से अधिक शिक्षकों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया है। सीबीआरटीआई का उद्देश्य केवल शहद उत्पादन को बढ़ावा देना है, बल्कि किसानों को कृषि और बागवानी कंपनियों की जानकारी बढ़ाना, शिक्षा से संबंधित अनुसंधान माध्यमों को बढ़ावा देना और उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना भी है।

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