गौचर/चमोली। श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन बमोथ गांव में श्रीमद् भागवत कथा का ज्ञानामृत कराते हुए कथा वाचक व्यास आचार्य राजेन्द्र प्रसाद पुरोहित ने आज की कथा में कृष्ण जी की बाल लीलाओं का वर्णन किया । जिसमें अविद्या को समाप्त कर ज्ञान प्राप्त करने के लिए भगवान ने पूतना का वध किया है।
कुबेर के दोनों पुत्रों द्वारा गलती करने से वृक्ष बन जाने के कारण उनका उद्धार किया। सात वर्ष की अवस्था में भगवान कृष्ण ने कनिष्ठिका ऊंगली पर गोर्वधन पर्वत सात दिन तक धारण कर वृन्दावन वासियों की रक्षा कर इन्द्र का अभिमान समाप्त किया।
भगवान कृष्ण ने माता यशोदा को माध्यम बनाकर समाज को शिक्षा देने का कार्य किया है भगवान ने वृंदावन में आकर अपनी लीला दिखाई। गोपाष्टमी के दिन गौ माता का पूजन करने से सारे देवी देवताओं की पूजा करने जैसा फल मिलता है। भगवान की भक्ति में लीन होने से ही गोपी का स्वरूप प्राप्त हो जाता है। शांति, शीलता और विनम्रता अपनाने से ही भागवत कथा सुनने का लाभ धर्म लाभ प्राप्त होता है। आयोजन में पंडित गोपालदत्त थपलियाल, प्रदीप लखेडा़, नितिन सेमवाल, सूरज बेलवाल, अमरदेव खण्डूड़ी ,परमानंद, दीपेन्द्र ,कैलाश, राजेंद्र, शम्भू प्रसाद, मनोज,देवीप्रसाद खण्डूड़ी, गोविंद प्रसाद मैठाणी, सहित कई लोगों का सहयोग रहा।